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अमन सिंह ने भूपेश बघेल को सत्ता से बाहर रखने बनाया प्लान ..,

अमन सिंह ने  भूपेश बघेल को सत्ता  से बाहर रखने  बनाया प्लान ..,

*सीएम और सुपर सीएम ने एग्ज़िट पोल के बाद शुरू किया प्लान बी पर काम, भूपेश को सीएम बनने से रोकने के लिए बनाये गए प्लान B की ये है रणनीति*

एग्जिट पोल ने मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह और सुपर सीएम को छत्तीसगढ़ की सत्ता से एग्जिट का संकेत दे दिया है। ख़बर है कि सत्ता के सबसे मज़बूत स्तंभ इन दोनों ने अपने प्लान बी पर काम शुरू कर दिया है। ये प्लान बी है- किसी भी कीमत पर भूपेश को मुख्यमंत्री न बनने देना। ये दोनों चाहते हैं कि कांग्रेस का मुख्यमन्त्री वो व्यक्ति बने। जिसके शासनकाल में ये दोनों कम्फ़र्टेबल रहें। इनपर किसी किस्म की आंच न आये।

आखिर भाजपा के दोनों शातिर खिलाड़ी ऐसा क्यों चाहते हैं। इसपर प्रकाश डालने से पहले ये समझिये कि प्लान बी को सफल तरीके से लागू करने की कार्ययोजना किस प्रकार से बनाई गई है और इनका प्लान ए क्या था।

प्लान- ए का मकसद रमन सिंह को छत्तीसगढ़ के सिंहासन पर बिठाना था। बताया जाता है कि जब यह राह मुश्किल दिखी तो पर्दे के पीछे रहकर अजीत जोगी और बसपा का गठबन्धन कराया गया। सुपर सीएम और सीएम को उम्मीद थी कि जोगी गठबंधन के बाद इतने प्रभावी हो जाएंगे कि कांग्रेस को रोक लेंगे और बीजेपी की वापसी का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन यह दांव एग्जिट पोल के अनुसार व्यर्थ जाता दिख रहा है। तो जोड़ी ने प्लान बी पर काम शुरु कर दिया है। जिसकी तैयारी पहले से करके रखी गई थी।

अगर सूत्रों पर विश्वास करें तो प्लान बी का बजट 500 करोड़ है। इस काम में पर्दे के पीछे एक बड़ा उद्योगपति शामिल है। जिसे छत्तीसगढ़ में काले सोने की खदानें मिली हैं। कानून को अपने ठेंगे में रखने के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात इस उद्योगपति का मकसद इतना है कि उसकी नियम विरुद्ध काले सोने की खुदाई बेरोकटोक जारी रहे।

ईमानदार और ताक़तवर मुख्यमंत्री हो सकते हैं भूपेशबघेल

सत्ता और धंधा के इस खेल में एक और शख्स है, जो सुपर सीएम का प्यादा है। ये व्यक्ति छत्तीसगढ़ में अब तक सारे स्टिंग का कर्ताधर्ता है। लोगों को लगता था कि इसकी निष्ठा सागौन बंगले की ओर है। लेकिन अब जाकर ये पता चला है कि ये सुपर सीएम का मोहरा है।

प्लान बी में कई विकल्प हैं। एक विकल्प यह है कि धन लालच और दबाव के जरिये विधायकों को भुपेश के खिलाफ भड़का दिया जाए। राहुल गांधी के सामने भुपेश का विरोध कराया जाए। सत्ता की ये रणनीति भुपेश के स्टिंग के वक़्त आजमाई जा चुकी है। अगर राहुल गांधी भूपेश को मुख्यमंत्री बनाने चाहेंगे तो विधायको का विरोध असरदार हो सकता है।

प्लान बी में विकल्प दो भी है। इस विकल्प के मुताबिक कांग्रेस के नेताओं और विधायकों को एक ऐसे नेता के पीछे खड़ा किया जाएगा, जो इनसे मैनेज रहे। ताकि सीएम और सुपर सीएम को कांग्रेस के राज में कोई परेशानी न हो। उनके राज का काला-पीला दफन रहे। इस काम में 500 करोड़ तक खर्च किया जा सकता है।

ये माना जा रहा है कि भुपेश बघेल को सत्ता से दूर रखने के लिए सुपर सीएम अपने मोहरे का भी इस्तेमाल कर सकता है।

अब उस बात पर आते हैं कि आखिर ऐसा क्यों ? दोनों रणनीतिकारों को यह डर सता रहा है कि अगर भूपेश मुख्यमंत्री बन गए तो सीएम और सुपर सीएम के वो मामले खुल जाएंगे जिन्हें ये दोनों अपने प्रभाव से दबाते रहे हैं।

इन मामलो में भूपेश इन्हें जेल भिजवा सकते है। नान मामले में भुपेश ने सीएम मैडम के खिलाफ़ चालान पेश करने की बात की है।

भुपेश बघेल झीरम का सच सामने लाने पर आमादा हैं। कांग्रेस का मानना है इसका सच प्रदेश के कई राजनेताओं और अधिकारियों की राजनीतिक तबियत खराब कर देगा।

भुपेश के सीएम बड़े उद्योगपतियों की मनमानी रुक सकती है। मनमानी करने की छूट के बदले सत्ता के शीर्ष लोगों तक करोड़ो का चढ़ावा आता था। जो पूरी तरह से बन्द हो जाएगा। प्रदेश में खदान बीजेपी सरकार के बड़े नेताओं को फंड करने वाले उद्योगपतियों को ज्यादातर बड़ी खदानें दी हुई हैं। भुपेश के सत्ता में आने पर इन पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। इन सभी बातों से आशंकित सीएम और सुपर सीएम ने प्लान बी पर काम कर दिया है।

– चमन सिंह

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