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बहुत ही रोचक रहेगा विधानसभा चुनाव २०१८,चुनाव में नोटा का भी होगा अहम योगदान

बहुत ही रोचक रहेगा विधानसभा चुनाव २०१८,चुनाव में नोटा का भी होगा अहम योगदान

प्रांजल शुक्ला की कलम से विधानसभा चुनाव २०१८

भाजपा कांग्रेस के समीकरण को जोगी की पार्टी कहीं बिगाड़ न दे

कोरबा – वक्त आ चूका है २०१८ विधानसभा चुनाव का,ऐसे में देखना ये है की बाजी कोन मारेगा और कौन मुख्यमंत्री के सिंहासन पर विराजमान होगा।
छत्तीसगढ़ में भाजपा,कांग्रेस मुख्य दल माने जाते है,अब एसे में देखना यह होगा की इस बार के विधानसभा चुनाव में होना क्या है,क्योकि इस बार छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजित जोगी ने कांग्रेस से अलग होकर जनता कांग्रेस नाम की अलग पार्टी बनाई है,जिसने अभी फ़िलहाल में बहुजन समाज पार्टी से गठ्बन्धन कर लिया है।वहीँ भाजपा एवं कांग्रेस की ताबड़तोड़ सभाएं एवं कार्यक्रम राज्य में हलचल पैदा करने के लिए काफी है।इसी प्रकार इस चुनाव में गोंगपा एवं सपा भी कहीं न कहीं अपना जलवा बिखेरेगा।इसी प्रकार आम आदमी पार्टी भी वोट के हिसाब से अच्छी स्थिति में नजर आ रहा है।
माना जा रहा है की इस बार का चुनाव बहुत ही ज्यादा रोमांचक होने वाले है,इसके लिए सभी पार्टी ने ताबड़तोड़ चुनाव अभियान शुरू कर दिए है,इस बार के चुनाव में वैसे तो सभी विधानसभा सिटो में निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन भरा है,लेकिन कुछ विधानसभा सीटों के प्रत्याशियों की पकड़ काफी मजबूत मानी जा रही है।
सभी पार्टी व दल अपने प्रत्याशी के चयन काफी गम्भीर रूप से कर रहे है,काफी सोच विचार करके वे अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर रहे है,विधानसभा की परिस्थिति की गम्भीरता को समझते हुए प्रत्याशी का चयन कर रहे है।
२०१४ के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में शुरू हुए नोटा (नन ऑफ़ दी अबोव),जो की वोटर मशीन में वोट करने का एक ऑप्शन है,इसमें यदी मतदाता को यदि कोई प्रत्याशी पसंद नही है तो वह नोटा को वोट कर सकता है,नोटा का उपयोग इस बार के चुनावो में भी होना है,एक नजरिये से यह एक अच्छा उपाय है पहले के समय में जब लोगो को कोई प्रत्याशी पसंद नही होते थे टो वो मतदान करने ही नही जाते थे तब गलत प्रत्याशी जीत जाते थे,यदि चुनाव में नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलते है टो एसे में उस विधानसभा क्षेत्र का चुनाव निरस्थ हो जायेगा।
बहुत से समाजिक संगठनो ने नोटा को वोट देने का मन भी बना लिया है,एसे में देखना ये है की चुनाव में होना क्या है,
सभी दलों ने विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव जितने के लिए स्टार प्रचारक,चुनाव अभियान समिति जैसे ओर भी समिति का गठन कर लिया है,देखना यह होगा की ये समिति का गठन चुनाव जितने में असरदार होगा की नही,वही कुछ क्षेत्रों में प्रत्याशी चयन को लेकर कार्यकर्ताओ द्वारा अपने ही पार्टी के प्रत्याशियों के खिलाफ विरोध का माहोल नजर आ रहा है।

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